रविवार, 15 दिसंबर 2013

सूरदास के पद ...स्याम कमल पद नख की सोभा । ..

सूरदास के पद ..स्याम कमल पद नख की सोभा ।       ...प्रस्तुति प्रेमकुमार

सखी कहती है – श्याम के कमल रूपी चरण के नख की शोभा का वर्णन नहीं किया जा सकता है । श्याम के उन नख –चंद्रों को जिन्हें इन्द्र ने अपने मस्तक से लगाया ;ब्रह्मा और शिव जिन नख –चंद्रों पर मग्न रहे मुनि जिनका ध्यान असमंजस होकर करते हैं कि दर्शन का सौभाग्य मिले या न मिले ; नारद जिन्हें एक क्षण के लिए भी नहीं भुला पाये और लक्ष्मी जी का हृदय जिनको स्पर्श रता रहता  है, परंतु बृज  की गोपियाँ ही ऐसी हैं जो प्रत्यक्ष उनकी शोभा देख कर हर्षित होती हैं ,,,देखें सूरदास  जी का यह पद ...स्याम कमल पद नख की सोभा ।  ...प्रस्तुति प्रेमकुमार
  
स्याम कमल पद नख की सोभा ।
जे नख चं इन्द्र सिर परसे,सिव बिरंचि मन लोभा ।
जे नख चंसनक मुनि ध्यावत नहीं पावत भरमाहीं ।।
जे नख चंप्रगब्रज जुबती निरखि निरखि हरषाहीं ।
जे नख चंफनिंद ह्रदय तें एकौ निमिष न टारत ।
जे नख चं महामुनि नारद  पलक न कहू बिसारत।।
जे नख चंभजन खल नासत, रमा ह्रदय जे परसति ।
सूर स्याम नख चंद बिमल छबि गोपी जन मिलि दरसति।।
16/12/2013










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