कबीरदास ...
झीनी झीनी बीनी चदरिया॥...प्रस्तुति
प्रेमकुमार
कबीरदास जी की इस आध्यात्मिक
एवं निर्गुण रचना में शरीर
और मन की पवत्रिता का संदेश दिया गया
है ।मानव शरीर की
रचना इस प्रकार हुई है कि यदि
साधक का शरीर पवित्र और
मन निर्मल हो तो उसे परमात्मा
कि प्राप्ति अपने अंदर डूबने
से ही हो जाएगी । वाह्य आडंबर
में यदि उसका मन भटका है
तो वह परमात्मा से दूर चला जायगा
। चादर मैली हो जाएगी
और जीवन निरर्थक हो जाएगा । कितने
मुनि और साधक राह
भटक गए । देखें कबीरदास यह पद
... झीनी झीनी बीनी
चदरिया॥...प्रस्तुति प्रेमकुमार
झीनी झीनी बीनी चदरिया॥
काहे कै ताना काहे कै भरनी कौन तार
से बीनी चदरिया।
इंगला पिंगला ताना भरनी सुषमन तार
से बीनी चदरिया॥
आठ कंवल दल चरखा डोले, पाँच
तत्त गुन तीनी चदरिया।
साईं को सियत मास दस लागे ठोक ठोक के
बीनी चदरिया॥
सो चादर सुर नर मुनि ओढ़े, ओढ़
के मैली कीनी चदरिया।
दास कबीर जतन से ओढ़ी ज्यों की त्यों धर
दीनी चदरिया॥
18/12/2013

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