भगवान श्री कृष्ण ने
अर्जुन को आत्मा के संबंध में जो उपदेश दिए , आत्मा को जानने-समझने के लिए महर्षि मेंहीं
ने इस पदावली में इस
गूढ़ विषय को किस प्रकार हमारे समक्ष रखा है ... देखें पदावली के कुछ अंश... प्रस्तुति प्रेमकुमार ...
न लचकन न सिकुड़न न
कंपन है जामें ।
न संचालना नाहिं
विस्तृत्व जामें॥
है अणु नाहिं परमाणु भी नाहिं जामें ।
न रेखा न लेखा नहीं
बिन्दु जामें ।।
सभी के परे
जो परम तत्त्व रूपी ।
सोई आत्मा है
सोई आत्मा है।।
नहीं स्थूल रूपी
नहीं सूक्ष्म रूपी ।
न कारण स्वरूपी नहीं
व्यक्त रूपी ।।
नहीं जड़स्वरूपी न चेतन स्वरूपी ।
नहीं पिण्ड
रूपी न ब्रहमाण्ड रूपी ।।
सभी के परे
जो परम तत्त्व रूपी ।
सोई आत्मा है
सोई आत्मा है।।



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