सोमवार, 2 दिसंबर 2013

महर्षि मेंहीं-पदावली :(2) :सभी के परे जो परम तत्त्व रूपी ...सोई आत्मा है सोई आत्मा है...प्रस्तुति प्रेमकुमार




भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को आत्मा के संबंध में जो उपदेश दिए , आत्मा को जानने-समझने के लिए महर्षि मेंहीं
ने इस पदावली में इस गूढ़ विषय को किस प्रकार हमारे समक्ष रखा है ... देखें पदावली के कुछ अंश... प्रस्तुति प्रेमकुमार ...
 (2)
न लचकन न सिकुड़न न कंपन है जामें ।
न संचालना नाहिं विस्तृत्व      जामें॥
है अणु नाहिं  परमाणु भी नाहिं   जामें ।
न रेखा न लेखा नहीं बिन्दु      जामें ।।
सभी के  परे       जो परम तत्त्व रूपी ।
सोई आत्मा है          सोई आत्मा है।।

नहीं स्थूल रूपी नहीं       सूक्ष्म  रूपी ।
न कारण स्वरूपी नहीं व्यक्त       रूपी ।।
नहीं जड़स्वरूपी       न चेतन स्वरूपी ।
नहीं पिण्ड रूपी       न ब्रहमाण्ड रूपी ।।
सभी के  परे       जो परम तत्त्व रूपी ।
सोई आत्मा है          सोई आत्मा है।।


02/12/2013                    

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