बुधवार, 11 दिसंबर 2013

गुरु नानक की वाणी... जगत में झूठी देखी प्रीत।..

जिस संसार के मोह –माया में हम घिरे रहते हैं ,जिसे हम वास्तविक प्रेम समझ बैठे हैं, वह छलावा –मात्र है । सभी अपने-अपने सुखों में लगे हैं।अंत समय में नाते –रिश्ते किसी काम में नहीं आते हैं ।सच्चा प्रेम कहीं नहीं है ।पर यह बात मन मानने को तैयार नहीं होता है ।यदि मन को इस बात का बोध हो जाय, तो प्रभु-मिलन का मार्ग सुगम हो जाता है...देखें गुरु नानक जी का यह पद ...जगत में झूठी देखी प्रीत. प्रस्तुति प्रेमकुमार


जगत में झूठी देखी प्रीत।
अपने ही सुखसों सब लागे , क्या दारा क्या मीत ।।
मेरो मेरो सभी क़हत हैं ,   हित सों   बाध्यौ चीत ।
अंतकाल संगी नहीं काऊ,    यह अचरज  ली बात ।।
मन मूरख अजहूँ नहिं समुझत , सिख दै हारयो नीत ।
नानक भव-जल-पार परै जो गावै प्रभु के     गीत ।।

11/12/2013
pkjayaswal11@gmail.com


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