बालक राम सो रहें
हैं । माँ कौशल्या उन्हे जगाना चाह रही हैं क्योंकि सुबह हो गयी है । कमल खिल गए
हैं । कुमुदिनी ने अपना चेहरा छुपा लिया है । चाँद की ज्योति धीमी पड़ गयी है ।
तारे भी क्षीण हो गए हैं । मुर्गा भी बोलने लगा है ।राम
के सखा भी खेलने आ
गए हैं । ... देखें तुलसीदास का यह पद... : गीतावली से :भोर भयो जागहु , रघुनंदन!..प्रस्तुति
प्रेमकुमार
भोर भयो जागहु ,
रघुनंदन!
गत –व्यलीक भगतनि उर-चन्दन ।।
ससि करहीन, छिन दुति
तारे ।
तमचुर मुखर ,सुनहु मेरे
प्यारे ।।
विकसित कंज ,कुमुद
बिलखाने ।
लै पराग रस मधुप
उड़ाने ।।
अनुज सखा सब बोलनि आए ।
बंदिन्ह अति पुनीत गुन
गाये ।।
मन भावतो कलेऊ
किजै ।
तुलसिदास कहं जूंठनि
दीजै ।।
08/ 08/12/2013


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