बुधवार, 30 मार्च 2016

मंगलवार, 29 मार्च 2016

श्री हनुमान चालीसा -39-40

श्री हनुमान चालीसा


जो यह पढ़ै हनुमान् चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।

नाथ हृदय महँ डेरा।।39-40


सोमवार, 28 मार्च 2016

श्री हनुमान चालीसा-37-38

श्री हनुमान चालीसा
जय जय जय हनुमान गौसाईं।
वृपा करहु गुरुदेव की नाईं।
जो त बार पाठ कर कोई।
छुटहि बंदि महासुख होई।।37-38





श्री हनुमान चालीसा-35-36

श्री हनुमान चालीसा
जय जय जय हनुमान गौसाईं।
वृपा करहु गुरुदेव की नाईं।
जो त बार पाठ कर कोई।

छुटहि बंदि महासुख होई।35-36



रविवार, 27 मार्च 2016

श्री हनुमान चालीसा-35-36

श्री हनुमान चालीसा
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत् सेई सर्व सुख करई।।
संकट कटै मिटे सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।35-36



शनिवार, 26 मार्च 2016

इच्छाएं

इच्छाएं यदि हजार हों ,
और परमात्मा –मिलन की एक इच्छा हो ,
तो फिर कोई इच्छा शेष नहीं रह जाती ,

बर्फ की भांति सब पिघल जाएंगी ।

शुक्रवार, 25 मार्च 2016

गुरु नानक

गुरु नानक
यह मन नेक न कह्यौ करे।
मद-माया-बस भयौ बावरौ, हरिजस नहिं उचरै।
करि परपंच जगतके डहकै अपनौ उदर भरै॥

श्री हनुमान चालीसा -33-34

 श्री हनुमान चालीसा                     
तुम्हरे भजन राम को पावै.
 जनम जनम के दु:ख बिसरावै।।
अन्त काल रघुबर पुर जाई।
 जहाँ जन्म हरि–भक्त कहाई।।33-34    

गुरुवार, 24 मार्च 2016

अभिलाषा

अभिलाषा

इतना तो करना स्वामी , जब प्राण तन से निकले
गोविन्द नाम लेके , तब प्राण तन से निकले ! 1.

श्री गंगा जी का तट हो , जमुना का वंशीवट हो
मेरा साँवरा निकट हो , जब प्राण तन से निकले ! 2.

श्री वृन्दावन का तल हो , मेरे मुख में तुलसीदल हो
विष्णु चरण का जल हो , जब प्राण तन से निकले ! 3.

पीताम्बरी कसी हो ,छवि मन में ये बसी हो
होठों पे कुछ हँसी हो , जब प्राण तन से निकले ! 4.
         मेरा प्राण निकले सुख से , तेरा नाम निकले मुख से
बच जाऊं घोर दुःख से , जब प्राण तन से निकले ! 5.
         जब प्राण कंठ आये , कोई रोग न सताए
यम दरस न दिखाए , जब प्राण तन से निकले ! 6.
         उस वक़्त जल्दी आना , नहीं श्याम भूल जाना
         राधे को साथ लाना , जब प्राण तन से निकले ! 7.
           एक भक्त की है अर्जी , खुदगर्ज़ की है गरजी
            आगे तुम्हारी मर्ज़ी , जब प्राण तन से निकले ! 8                


                                             

सोमवार, 21 मार्च 2016

गुरु नानक

गुरु नानक 
• 
दीन दयाल सदा दु:ख-भंजन, ता सिउ रुचि न बढाई।
नानक कहत जगत सभ मिथिआ, ज्यों सुपना रैनाई॥


अभिलाषा





अभिलाषा

इतना तो करना स्वामी , जब प्राण तन से निकले
गोविन्द नाम लेके , तब प्राण तन से निकले ! 1.

श्री गंगा जी का तट हो , जमुना का वंशीवट हो
मेरा साँवरा निकट हो , जब प्राण तन से निकले ! 2.

श्री वृन्दावन का तल हो , मेरे मुख में तुलसीदल हो
विष्णु चरण का जल हो , जब प्राण तन से निकले ! 3.

पीताम्बरी कसी हो ,छवि मन में ये बसी हो
होठों पे कुछ हँसी हो , जब प्राण तन से निकले ! 4.
         मेरा प्राण निकले सुख से , तेरा नाम निकले मुख से
बच जाऊं घोर दुःख से , जब प्राण तन से निकले ! 5.
         जब प्राण कंठ आये , कोई रोग न सताए

यम दरस न दिखाए , जब प्राण तन से निकले ! 6.

श्री हनुमान चालीसा-29-30

.
श्री हनुमान चालीसा
चारों जुग परताप तुम्हारा।
 है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु सन्त के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।29-30



श्री हनुमान चालीसा-25-26

श्री हनुमान चालीसा

रोग हरै सब पीरा।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।25-26

गुरु नानक

·        हरि बिनु तेरो को न सहाई।
·                                         धनु धरनी अरु संपति सगरी जो मानिओ अपनाई

·   
   तन छूटै कुछ संग न चालैकहा ताहि लपटाई॥

रविवार, 20 मार्च 2016

अभिलाषा

                                     अभिलाषा

इतना तो करना स्वामी , जब प्राण तन से निकले
गोविन्द नाम लेके , तब प्राण तन से निकले ! 1.

श्री गंगा जी का तट हो , जमुना का वंशीवट हो
मेरा साँवरा निकट हो , जब प्राण तन से निकले ! 2.

श्री वृन्दावन का तल हो , मेरे मुख में तुलसीदल हो
विष्णु चरण का जल हो , जब प्राण तन से निकले ! 3.

पीताम्बरी कसी हो ,छवि मन में ये बसी हो
होठों पे कुछ हँसी हो , जब प्राण तन से निकले ! 4.
         मेरा प्राण निकले सुख से , तेरा नाम निकले मुख से
बच जाऊं घोर दुःख से , जब प्राण तन से निकले ! 5.
                     
          .


शनिवार, 19 मार्च 2016

नानक

  • नानक
·                                  हरि बिनु तेरो को न सहाई।

                       काकी मात-पिता सुत बनिता, को काहू को भाई

अभिलाषा


अभिलाषा 
इतना तो करना स्वामी , जब प्राण तन से निकले
गोविन्द नाम लेके , तब प्राण तन से निकले ! 1.

श्री गंगा जी का तट हो , जमुना का वंशीवट हो
मेरा साँवरा निकट हो , जब प्राण तन से निकले ! 2.

श्री वृन्दावन का तल हो , मेरे मुख में तुलसीदल हो
विष्णु चरण का जल हो , जब प्राण तन से निकले ! 3.

पीताम्बरी कसी हो ,छवि मन में ये बसी हो
होठों पे कुछ हँसी हो , जब प्राण तन से निकले ! 4.
.


श्री हनुमान चालीसा-23-24

. श्री हनुमान चालीसा
आपन तेज सम्हारो आपै।


तीनों लोक हाँक तें काँपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।

महाबीर जब नाम सुनावै।।23-24

बुधवार, 16 मार्च 2016

श्री हनुमान चालीसा-20

श्री हनुमान चालीसा
दुर्गम काज जगत के जेते।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।20


अभिलाषा

अभिलाषा
इतना तो करना स्वामी !
जब प्राण तन से निकले ।।
       श्री गंगा जी का तट हो ,
       यमुना का बंसी –वट हो ।
       मेरे सांवरा निकट     हो ,
जब प्राण तन से निकले ।।