मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

महर्षि मेंहीं-पदावली : (3) सभी के परे जो परम तत्त्व रूपी ...सोई आत्मा है सोई आत्मा है...प्रस्तुति प्रेमकुमार ...




भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को आत्मा के संबंध में जो उपदेश दिए , आत्मा को जानने-समझने के लिए महर्षि मेंहीं ने इस पदावली में इस गूढ़ विषय को किस प्रकार हमारे समक्ष रखा है ... देखें पदावली के कुछ अंश... प्रस्तुति प्रेमकुमार ...

(3)

है जल थल में जोइ पै जल थल है नाहीं ।
अगिन वायु में जो अगिन वायु    नाहीं ।।
जो त्रय गुण गगन में  न त्रयगुण आकाशा ।
जो इंद्रिन में रहता न होता तिन्हन   सा ।
सभी के  परे       जो परम तत्त्व रूपी ।
सोई आत्मा है          सोई आत्मा है।।

कभी नाहिं आता      न जाता है जोई ।
कभी नाहिं वक्ता       न श्रोता है जोई ।।
कभी जो कर्त्ता न अकर्त्ता      कहलाता ।
बिना जिसके कुछ भी न होता बुझाता ।।
सभी के  परे       जो परम तत्त्व रूपी ।
सोई आत्मा है          सोई आत्मा है।।

कभी ना अगुण वा    सगुण ही है जोई  ।
नहीं सत असत  मर्त्य अमरहु ना जोई ।।
अछादन करनहार      अरु ना अछादित ।
न भोगी न योगी    नहीं हित न अनहित।।
सभी के  परे       जो परम तत्त्व रूपी ।
सोई आत्मा है          सोई आत्मा है।।

त्रिपुटि किसी में न आवै कभी भी ।
औ सापेक्ष भाषा न पावै कभी भी ।।
ओंकार शब्दब्रह्म हू को जो पर है ।
हत अरु अनाहत सकल शब्द पर है।।
सभी के  परे   जो परम तत्त्व रूपी ।
सोई आत्मा है      सोई आत्मा है।।




03/12/2013

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