सोमवार, 21 मार्च 2016

अभिलाषा





अभिलाषा

इतना तो करना स्वामी , जब प्राण तन से निकले
गोविन्द नाम लेके , तब प्राण तन से निकले ! 1.

श्री गंगा जी का तट हो , जमुना का वंशीवट हो
मेरा साँवरा निकट हो , जब प्राण तन से निकले ! 2.

श्री वृन्दावन का तल हो , मेरे मुख में तुलसीदल हो
विष्णु चरण का जल हो , जब प्राण तन से निकले ! 3.

पीताम्बरी कसी हो ,छवि मन में ये बसी हो
होठों पे कुछ हँसी हो , जब प्राण तन से निकले ! 4.
         मेरा प्राण निकले सुख से , तेरा नाम निकले मुख से
बच जाऊं घोर दुःख से , जब प्राण तन से निकले ! 5.
         जब प्राण कंठ आये , कोई रोग न सताए

यम दरस न दिखाए , जब प्राण तन से निकले ! 6.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें