मंगलवार, 8 मार्च 2016

श्री हनुमान चालीसा -12

श्री हनुमान चालीसा
12.   रघुपति कीन्ही
बहुत बडाई ।
      
तुम मम प्रिय भरतहिसम भाई ॥


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