शुक्रवार, 25 मार्च 2016

श्री हनुमान चालीसा -33-34

 श्री हनुमान चालीसा                     
तुम्हरे भजन राम को पावै.
 जनम जनम के दु:ख बिसरावै।।
अन्त काल रघुबर पुर जाई।
 जहाँ जन्म हरि–भक्त कहाई।।33-34    

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