सोमवार, 28 मार्च 2016

श्री हनुमान चालीसा-35-36

श्री हनुमान चालीसा
जय जय जय हनुमान गौसाईं।
वृपा करहु गुरुदेव की नाईं।
जो त बार पाठ कर कोई।

छुटहि बंदि महासुख होई।35-36



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें