सोमवार, 28 मार्च 2016

श्री हनुमान चालीसा-37-38

श्री हनुमान चालीसा
जय जय जय हनुमान गौसाईं।
वृपा करहु गुरुदेव की नाईं।
जो त बार पाठ कर कोई।
छुटहि बंदि महासुख होई।।37-38





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