सोमवार, 21 मार्च 2016

गुरु नानक

गुरु नानक 
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दीन दयाल सदा दु:ख-भंजन, ता सिउ रुचि न बढाई।
नानक कहत जगत सभ मिथिआ, ज्यों सुपना रैनाई॥


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