अभिलाषा
इतना तो करना स्वामी , जब प्राण तन से निकले
गोविन्द नाम लेके , तब प्राण तन से निकले ! 1.
श्री गंगा जी का तट हो , जमुना का वंशीवट हो
मेरा साँवरा निकट हो , जब प्राण तन से निकले ! 2.
श्री वृन्दावन का तल हो , मेरे मुख में तुलसीदल हो
विष्णु चरण का जल हो , जब प्राण तन से निकले ! 3.
पीताम्बरी कसी हो ,छवि मन में ये बसी हो
होठों पे कुछ हँसी हो , जब प्राण तन से निकले ! 4.
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