सोमवार, 21 मार्च 2016

श्री हनुमान चालीसा-29-30

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श्री हनुमान चालीसा
चारों जुग परताप तुम्हारा।
 है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु सन्त के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।29-30



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