वियोग में व्यथित कृष्ण
की
गोपियाँ...
कृष्ण के वियोग में
गोपियों की क्या अवस्था हो गयी है...यह बताती हैं
गोपियाँ –उद्धव को
...प्रस्तुति : प्रेमकुमार (कवि-सूरदास)
निशि दिन बरसत नैन
हमारे।
सदा रहत पावस ऋतु हम
पर
जबतें श्याम सिधारे
।
अंजन थिर न रहत
अंखियन में
कर कपोल भय कारे।
कंचुकि-पट सुखत नहीं
कबहूँ,
उर बिच बहत पनारे ।
आँसू सलिल भये पग
थाके,
बहे जात-सीत-तारे ।
सूरदास अब ड़ूबत है
ब्रज,
काहे न लेत उबारे ।
(सूरदास)


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