जानकी का गौरी-पूजन
रामचरित मानस से...प्रसंग है जानकी का गौरी-पूजन...भवानी के मंदिर में सीता की वंदना...तुलसीदास जी के शब्दों में...
जय जय गिरिबरराज
किशोरी।
जय महेस मुख
चंद चकोरी ।।,
जय गजबदन सडानन माता
।
जगत जननि दामिनी
दुति गाता ।।
नहिं तब आदि मध्य
अवसाना ।
अमित प्रभाउ बेदु
नहीं जाना ।।
भव भव विभव पराभव कारिनि
।
बिस्व बिमोहिनी
स्वबस बिहारिनी ।।
मोर मनोरथ
जानहु निकें ।
बसहु सदा उर पुर
सबही कें ।।
कीन्हेऊँ प्रगट न
कारन तेहीं ।
अस कहि चरन गहे
बैदेहीं ।।
बिनय प्रेम बस भई भवानी ।
खसी माल मूरति
मुस्कानी ।।
सादर सिंय प्रसादु सिर
धरेउ ।
बोली गौरि हरषु हिय
भरेऊ । ।
सुनु सिय सत्य असीस
हमारी ।
पूजिहि मन कामना तुम्हारी
।।
एहि भांति गौरि असीस
सुनि
सिय सहित हिय हरषी
अली ।
तुलसी भवानिहि पूजि
पुनि पुनि
मुदित मन मंदिर चली
।
) pkjayaswal11@gmail.com


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