मंगलवार, 22 अक्टूबर 2013

श्री रामचरितमानस से :( जानकी का गौरी-पूजन): जय जय गिरिबरराज किशोरी।


 जानकी का गौरी-पूजन

रामचरित मानस से...प्रसंग है जानकी का गौरी-पूजन...भवानी के मंदिर में सीता की वंदना...तुलसीदास जी के शब्दों में...

जय जय गिरिबरराज किशोरी।
जय महेस मुख चंद  चकोरी ।।,
जय गजबदन सडानन माता ।
जगत जननि दामिनी दुति गाता ।।
नहिं तब आदि मध्य अवसाना ।
अमित प्रभाउ बेदु नहीं जाना ।।
भव भव विभव पराभव कारिनि ।
बिस्व बिमोहिनी स्वबस बिहारिनी ।।

मोर  मनोरथ   जानहु     निकें  ।
बसहु सदा उर पुर सबही     कें  ।।

कीन्हेऊँ प्रगट न कारन तेहीं ।
अस कहि चरन गहे बैदेहीं  ।।
बिनय प्रेम  बस भई भवानी ।
खसी माल मूरति मुस्कानी ।।
सादर सिंय प्रसादु सिर धरेउ ।
बोली गौरि हरषु हिय भरेऊ । ।
सुनु सिय सत्य असीस हमारी ।
पूजिहि मन कामना  तुम्हारी ।।
एहि भांति गौरि असीस सुनि
सिय सहित हिय हरषी अली ।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि
मुदित मन मंदिर चली ।


)pkjayaswal11@gmail.com










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