मेरे प्रिय भजन: हे भोलानाथ !…मैथिली में...
कखन हरब दु:ख मोर
हे भोलानाथ !
दु:खहि जनम भेल,
दु:खहि गमाओल,
सुख सपनहु नहिं भेल ।
एहि भवसागर थाह कतहु नहिं
भैरव धरु करूआर ।
भनहि विद्यापति मोर भोलानाथ
गति करब अन्त मोही पार ।
(विद्यापति रचित)pkjayaswal11@gmail.com
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें