रविवार, 20 अक्टूबर 2013

विद्यापति : कखन हरब दु:ख मोर हे भोलानाथ !...

मेरे प्रिय भजन: हे भोलानाथ !मैथिली में...  

कखन हरब दु:मोर
हे भोलानाथ !

दु:खहि जनम भेल,
दु:हि गमाओल,
सुख सपनहु नहिं भेल ।

एहि भवसागर थाह कतहु नहिं
भैरव धरु करूआर ।
भनहि विद्यापति मोर भोलानाथ
गति करब अन्त मोही पार ।

(विद्यापति रचित)pkjayaswal11@gmail.com

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