शनिवार, 23 नवंबर 2013

सूरदास ...हरि सौं मीत न देख्यो कोई.


  सूरदास –पदावली ...हरि सौं मीत न देख्यो कोई... 



प्रभु जैसा कोई मित्र हो नहीं सकता । अपने भक्तों की मदद के लिए श्री हरि सर्वदा तत्पर रहते हैं । ग्राह से गजराज की रक्षा की ,लाक्षागृह में प्रभु की युक्ति से पांडवों की जान बची ,दुर्वासा के शाप से राजा अंबरीष को मुक्ति दिलायी । जिन भक्तों को प्रभु में अटल विश्वास है , उनके संकटों के निवारण की चिंता स्वयं परमात्मा करते हैं ।,,,देखें ... सूरदास जी का यह पद ....हरि सौं मीत न देख्यो कोई... प्रस्तुति ... प्रेमकुमार


हरि सौं मीत न देख्यो कोई ।
बिपति-काल सुमिरत ,तिहिं औसर आनि  तिरीछो होई ।।
ग्राह गहे  गजपति मुकरायौ , हाथ चक्र लै धायो ।
तजि बैकुंठ, गरुड़ तजि , निकट दास कै  आयो ।।
दुर्बासा कौ साप निवारयौ ,अंबरीष-पति   राखी ।
ब्रह्मलोक –परजंत फिरयौ तहं   देव –मुनि-जन साखी।।
लाखागृह तै जरत  पांडु-सुत बुधि-बल नाथ उबारे ।
सूरदास-प्रभु  अपने जनके  नाना त्रास  निवारे ।।


























कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें