बुधवार, 27 नवंबर 2013

महर्षि मेंहीं-पदावली : सभी के परे जो परम तत्त्व रूपी ...सोई आत्मा है सोई आत्मा है...प्रस्तुति प्रेमकुमार ...



महर्षि मेंहीं-पदावली : सभी के परे जो परम तत्त्व रूपी ...सोई आत्मा है सोई आत्मा है...प्रस्तुति प्रेमकुमार ...

भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को आत्मा के संबंध में जो उपदेश दिए , आत्मा को जानने-समझने के लिए महर्षि मेंहीं
ने इस पदावली में इस गूढ़ विषय को किस प्रकार हमारे समक्ष रखा है ... देखें पदावली के कुछ अंश... प्रस्तुति प्रेमकुमार ...

नहीं थल नहीं जल नहीं वायु अग्नी।
नहीं व्योम ना पाँच तन्मात्र   ठगनी ।।
ये त्रय गुण नहीं नाहिं इन्द्रिन चतुर्दश ।
नहिं मूल प्रकृति जो अव्यक्त आगम अस ।।
सभी के परे जो परम तत्त्व रूपी ।
सोई आत्मा है सोई आत्मा है   ।।

न उद्भित स्वरूपी न उष्मज स्वरूपी।
न अण्डज स्वरूपी न पिण्डज स्वरूपी ।।
नहीं विश्व रूपी न विष्णु  स्वरूपी ।
न शंकर स्वरूपी न ब्रह्मा स्वरूपी ।।
सभी के परे जो परम तत्त्व रूपी ।
सोई आत्मा है सोई आत्मा है   ।।

जो मारे मरै ना जो काटे कटे ना ।
जो साडै ना जो जारे जरे   ना ।।
जो सोखा ना जाता सोखे से कछु भी ।
नहीं टारा जाता टारे से  कछु  भी ।।
सभी के परे जो परम तत्त्व रूपी ।
सोई आत्मा है सोई आत्मा है   ।।

नहीं जन्म जाको नहीं मृत्यु जाको ।
नहीं  बाल यौवन ज्ररापन है जाको ।।
जिसे नाहिं होती अवस्था हु चारो ।
नहिं कुछ कहाता जो वर्णहू  चारो ।।
सभी के परे जो परम तत्त्व रूपी ।
सोई आत्मा है सोई आत्मा है   ।।
                          (क्रमश:)


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