गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014

देवी कात्यायनी

 
                            
                            देवी कात्यायनी 

 शक्ति का छठा स्वरुप है- माँ कात्यायनी। नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी का है। प्रसिद्ध महर्षि कात्यान ने कठोर तप कर माँ से उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेने का वरदान माँगा, ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर माँ पराम्बा ने उनकी इस इच्छा को पूरा किया और ऋषि कात्यान की पुत्री "देवी कात्यायनी" कहलाई। चार भुजा धारी माँ कात्यायनी सिंह पर सवार हैं। अपने एक हाथ में तलवार और दूसरे में अपना प्रिय पुष्प कमल लिये हुए हैं। अन्य दो हाथ वरमुद्रा और अभयमुद्रा में हैं।

देवी कात्यायनी का मंत्र (Devi Katyayani Mantra): सरलता से अपने भक्तों की इच्छा पूरी करने वाली माँ कात्यायनी का उपासना मंत्र है-चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना|कात्यायनी शुभं दद्या देवी दानव घातिनि||नवरात्र 2014 (6th Day of Navratri): नारदपुराण के अनुसार आश्विन शुक्ल षष्ठी यानि शारदीय नवरात्र के छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा करनी चाहिए। इस साल यह पूजा 30 सितंबर 2014 को की जाएगी।पूजा में उपयोगी खाद्य साम्रगी: षष्ठी तिथि के दिन देवी के पूजन में मधु का महत्व बताया गया है। इस दिन प्रसाद में मधु यानि शहद का प्रयोग करना चाहिए। इसके प्रभाव से साधक सुंदर रूप प्राप्त करता है। विशेष: मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी मानी गई हैं। शिक्षा प्राप्ति के क्षेत्र में प्रयासरत भक्तों को माता की अवश्य उपासना करनी चाहिए। 

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