माता चंद्रघंटा
माता चंद्रघंटा
माँ
दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की
पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है।
इस दिन साधक का मन ‘मणिपूर’ चक्र में प्रविष्ट होता है।माँ चंद्रघंटा
की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य
सुगंधियों का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं।
ये क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं।उपासनाया देवी
सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।अर्थ : हे माँ!
सर्वत्र विराजमान और चंद्रघंटा के रूप में प्रसिद्ध अम्बे, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। या मैं आपको
बारंबार प्रणाम करता हूँ। हे माँ, मुझे सब
पापों से मुक्ति प्रदान करें।इस दिन
सांवली रंग की ऐसी विवाहित महिला जिसके चेहरे पर तेज हो, को बुलाकर उनका पूजन करना चाहिए। भोजन में दही
और हलवा खिलाएँ। भेंट में कलश और मंदिर की घंटी भेंट करना चाहिए।
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