भक्ति-–साहित्य के अनमोल धरोहर से कुछ मोती पाठकों के समक्ष पेश करने की उत्कट अभिलाषा से प्रेरित है -यह प्रयास..
रविवार, 18 मई 2014
मीरा: मुरली चंग बजत उफ न्यारो, संग जुवति ब्रजनारी।
मुरली चंग बजत उफ न्यारो, संग जुवति ब्रजनारी।
चन्दन केसर छिरकत मोहन अपने हाथ
बिहारी। भरि-भरि मूठ गुलाल लाल चहुँ देत सबन पै डारी। छैल छबीले नवल कान्ह संग स्यामा
प्राण पियारी। गावत चार धमार राग तँह दै दै कर
करतारी।
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