संत
गुरु रविदास ( श्री रेदास ) रचनाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों
को दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान किया। लोकवाणी में ज्ञान
और प्रेम की धारा इनकी रचनाओं में अविरल गति से बही है । समाज में समन्वय की चेतना
जाग्रत करने वालों संतों में गुरु रविदास जी अग्रणी हैं । उनका
यह पद प्रस्तुत है ... प्रेमकुमार ने
यह पद प्रस्तुत है ... प्रेमकुमार ने
प्रभु जी तुम
चंदन हम पानी।
प्रभु जी तुम
चंदन हम पानी। जाकी अंग-अंग बास समानी॥
प्रभु जी तुम घन बन हम मोरा। जैसे चितवत चंद चकोरा॥
प्रभु जी तुम दीपक हम बाती। जाकी जोति बरै दिन राती॥
प्रभु जी तुम मोती हम धागा। जैसे सोनहिं मिलत सोहागा।
प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा। ऐसी भक्ति करै 'रैदासा॥
प्रभु जी तुम घन बन हम मोरा। जैसे चितवत चंद चकोरा॥
प्रभु जी तुम दीपक हम बाती। जाकी जोति बरै दिन राती॥
प्रभु जी तुम मोती हम धागा। जैसे सोनहिं मिलत सोहागा।
प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा। ऐसी भक्ति करै 'रैदासा॥
संत
गुरु रविदास: प्रभु जी तुम चंदन हम पानी।


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